(The eclipse mns24news.com देश विद्देश):- अगस्त 27 और 28 की रात आसमान में एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय घटना देखने को मिली। इस दौरान गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण हुआ, जिसमें ग्रहण के चरम पर चंद्रमा के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से पर पृथ्वी की गहरी छाया पड़ गई। इसी वजह से चंद्रमा का अधिकांश भाग लाल-तांबे जैसा दिखाई दिया और इसे आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ भी कहा गया। हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण था। (NASA Scientific Visualization Studio)
इस खगोलीय घटना को उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्से के अलावा यूरोप तथा अफ्रीका के कई क्षेत्रों में देखा गया। नासा के अनुसार ग्रहण का सबसे
प्रभावशाली चरण अमेरिका के कई हिस्सों, पश्चिमी यूरोप और
पश्चिमी अफ्रीका से दिखाई दिया। (NASA Science)
पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को यह ग्रहण इन देशों में दिखेगा और यहां नहीं
भारत में नहीं हुआ चंद्र ग्रहण का दीदार भारत में यह चंद्र ग्रहण
दिखाई नहीं दिया, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा भारतीय क्षेत्रों से देखने के लिए क्षितिज के नीचे था। इसलिए देश में लोगों को इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष नजारा नहीं मिल सका। (Space)
भारत में सूतक काल भी नहीं माना गया
चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं था, इसलिए सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल और ग्रहण से जुड़ी धार्मिक पाबंदियां लागू नहीं हुईं। ऐसे में मंदिर बंद करने या शुभ कार्य रोकने जैसी परंपराओं की आवश्यकता नहीं थी। (Indian Express – Bangla)
अब अगला चंद्र ग्रहण कब?
नासा के अनुसार 2026 का अगला और अंतिम चंद्र ग्रहण यही 27-28 अगस्त वाला आंशिक ग्रहण था। इसके बाद 20-21 फरवरी 2027 को उपच्छाया (Penumbral) चंद्र ग्रहण होगा, जो अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों समेत कई क्षेत्रों से दिखाई देगा। (NASA Science)
महासमुन्द न्यूज़ सर्विसेस चैनल पर पाठक भी खबर भेज सकते हैं मेल करे
mns24news@gmail.com Contact/WhatsApp 9425205847
फेस बुक पर सर्च करें https://www.facebook.com/mnsnewsmsmd
https://mns24news.com/ https://mns24.inको गूगल पर सर्च करें







