शिशु संस्कार के वार्षिक उत्सव पुरस्कार वितरण मे पहूची मोना सेन

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महासमुंद। संस्कार पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव एवं पुरूस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर ने कहा 7 बच्चों से शुरू हुए शिशु संस्कार स्कूल आज 15 सौ बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, यह गौरव की बात है। इस लक्ष्य को हासिल करना कोई मामूली बात नहीं है। इसके पीछे संचालन समिति द्वारा किए गए 40 वर्षों कड़ी मेहनत और लगन है। इस स्कूल से अध्ययन कर के निकले विभिन्न क्षेत्रों में स्कूल सहित महासमुंद का नाम रौशन कर रहे हैं। नपाध्यक्ष श्री चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ी फिल्म ऐक्टर मोना सेन का उद्धरण देते हुए कहा कि महासमुंद की धरा पर जन्मी और शिशु संस्कार स्कूल से पढ़ाई के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में अपना नाम रौशन किया है। इस दौरान पालिका अध्यक्ष श्री चंद्राकर ने कहा संचालन समिति को जब कभी मेरी आवश्यकता होगी सदेव हाजिर रहुंगा। इस वार्षिकोत्सव के स्पेशल गेस्ट छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री मोना सेन ने कहा मैं इस मिट्टी की बेटी हूं। यहां पली बढ़ी शिशु संस्कार स्कूल से शिक्षा अर्जित की। आज इस स्कूल की भव्यता को देख बहुत गौरव महसूस हो रही है। सुश्री सेन ने अपने पिता को स्मरण करते हुए कहा स्व. भजलेराम सेन ने 7 बच्चों को लेकर शिशु संस्कार की निव रखे थे। आज इस स्कूल की भव्यता खुद वयां कर रही है। उन्होंने कहा मानव जीवन में गुरु और माता पिता का मार्गदर्शन बहुत ही महत्वपूर्ण है। इनके दर्शन पा लिया समझो साक्षात देव दर्शन हो गए। इस अवसर पर मोना सेन ने स्कूल प्रबंधन की मांग पर 1968 में बनी राजा और रंक फिल्म की गीत जिसे लता मंगेशकर द्वारा गाया गया तु कितनी भोली है तु कितनी अच्छी है, प्यारी प्यारी है…ओ मॉ…ये दुनिया कांटों का तु फूलवारी है…ओ मॉ सुनकर दर्शकदीर्घा में बैठे अभिभावकों की आंखे नम हो गई। इसके पूर्व अतिथियों ने मॉ सरस्वती की छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभापति संदीप घोष, मोहन मदनकार, संचालन समिति के पदाधिकारी पारस चोपड़ा, मनोहर महंती, अरूण जोशी, शरद मालू, संजय अग्रवाल, अक्षत गोयल, समीर चौधरी, नैना श्रीवास्तव, प्राचार्य गुरुप्रीत कौर, शिक्षक एवं शिक्षिका तथा सैकड़ों आभिभावकगण उपस्थित थे।

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