
(The Growing mns24.com देश दुनिया) :- भारत में जैव एथेनॉल (Bioethanol) को स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन के रूप में तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। यह गन्ना, मक्का, चावल तथा अन्य कृषि बायोमास से तैयार किया जाता है और मुख्य रूप से पेट्रोल में मिलाकर परिवहन ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकार अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को भी बढ़ावा दे रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 85 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक शुद्ध एथेनॉल (E85 और E100) पर चलने वाले वाहनों के लिए नए नियमों और ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किए हैं। ब्राजील जैसे देशों में पहले से ही 100 प्रतिशत
एथेनॉल आधारित वाहन सफलतापूर्वक चल रहे हैं और
भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिर लौट आया पुराना स्टो वाला दिन
जैवएथेनॉल के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। एथेनॉल मिश्रण से ग्रीनहाउस गैसों और कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, गन्ने और मक्के जैसी फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होती है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए एथेनॉल के उपयोग से विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। पेट्रोल के अलावा अब एथेनॉल का उपयोग खाना पकाने में भी करने की योजना बनाई जा रही है। होटल और रेस्तरां में कमर्शियल कुकिंग के लिए एलपीजी के विकल्प के रूप में एथेनॉल आधारित ईंधन पर काम चल रहा है, जो पारंपरिक गैस सिलेंडरों की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने
100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को लाने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि, डस कदम से भारत का लगभग 22 लाख करोड रुपये का वार्षिक ईडंधन आयात बिल कम होगा और बढ़ते प्रद्रषण की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। पूणे में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए गडकरी ने कहा कि पूरी तरह एथेनॉल आधारित वाहनों की शुरुआत से कृषि, चीनी और ऑटोमोबाइल उद्योगों में बडे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसे वाहन बाजार में कब तक उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों के अनसार, एथेनॉल उपभोक्ताओं को 60 से 65 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर उपलब्ध कराया जा सकता है। डससे ईंधन खर्च में सीधे 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
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